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Top 100 Child Pedagogy CDP Important Questions In Hindi

CTET के द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन साल में दो बार किया जाता है | CTET के द्वारा परीक्षा में सम्मलित होकर आप शिक्षक बनने पात्र होते है | CTET के परीक्षाओ में पेपर 1 और पेपर 2 आयोजित किये जाते है जिसमे पेपर 1 से 1 से 5 के शिक्षक के पात्र है और पेपर 2 से 6 से 8 के शिक्षक के लिए पात्र होते है | पेपर 1 में CDP , EVS , Math और लैंग्वेज़ से प्रश्न पूछे जाते है | आज हम इस पोस्ट के माध्यम से बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों को देखेंगे |

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ctet cdp question and answer की तैयारी से आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते है | आप भी शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी करते हैं तो CDP के प्रश्न शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसे की – CTET, UPTET, HPTET, PSTET,BPSC TET ,MPTET ,etc में इससे सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं | यदि आप भी टीईटी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो इन प्रश्नों को जरुर पढ़े | आप भी शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी करते हैं तो इस Ctet cdp important questions को पूरा जरुर पढ़ें | आप इस पोस्ट में Top 100 Child Pedagogy CDP Important Questions In Hindi को देख अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते है |

CDP 100 MOST IMPOTANT QUESTION CTET AND TET

Important CDP questions for CTET

  • आकलन, विद्यालय आधारित तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के साथ समावेशित होनी चाहिए।
  • भाषा अर्जन क्या है ? _ जिसके द्वारा बालक भाषा को ग्रहण करने एवं समझने की क्षमता अर्जित करता है तथा बातचीत करने के लिए शब्दों एवं वाक्यों का प्रयोग करता है। इस तरह जब कोई बालक भाषा अर्जन की इस प्रक्रिया को सीख जाता है, तो उसके अंदर मानव भाषा को ग्रहण करने की क्षमता आ जाती है।
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  • भाषा अर्जन एक अवचेतन प्रक्रिया है। इसमें बालक के सीखने की प्रक्रिया व्याकरणीय नियमों से पूर्णतः अनभिज्ञ रहती है और वह प्रथम भाषा अर्जित करता है।
  • भाषा अर्जन की प्रक्रिया में बालक को एक प्राकृतिक संप्रेषण स्रोत की आवश्यकता होती है।
  • भाषा अर्जन तब होता है, जब बच्चा बिना सचेतन ध्यान के भाषा ग्रहण करता है।
  • कल्पना करना, स्मरण करना, विचार करना, निरीक्षण करना, समस्या समाधान करना, निर्णय लेना इत्यादि की योग्यता संज्ञानात्मक विकास के फलस्वरूप ही विकसित होते हैं।
  • बालक 6 माह से 1 वर्ष के बीच कुछ शब्दों को समझने एवं बोलने लगता है।
  • 3 वर्ष की अवस्था में वह कुछ छोटे वाक्यों को बोलने लगता है। 15 से 16 वर्षों के बीच काफी शब्दों की समझ विकसित हो जाती है।
  • अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ उक्त सभी अन्थियों (Endocrine Glands) से निकलने वाला हार्मोन बालक एवं बालिकाओं के शारीरिक विकास को प्रभावित करता है।
  • 12-14 वर्ष की आयु के बीच लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की लम्बाई एवं माँसपेशियों में तेजी से वृद्धि होती है एवं 14-18 वर्ष की आयु के बीच लड़कियों की अपेक्षा लड़कों की लम्बाई एवं माँसपेशियों तेजी से बढ़ती है।
  • युवा प्रौढ़ावस्था सामान्यतया 18 से 40 वर्ष तक।
  • किशोरावस्था एवं युवा प्रौढ़ावस्था (Adulthood) की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। यह अवस्था मानव-विकास में एक निश्चित परिपक्वता ग्रहण करने से प्राप्त होती है।
  • अधिगम (Learning) का अर्थ होता है-सीखना। अधिगम एक प्रक्रिया है, जो जीवन पर्यन्त चलती रहती है एवं जिसके द्वारा हम कुछ ज्ञान अर्जित करते हैं या जिसके द्वारा हमारे व्यवहार में परिवर्तन होता है।
  • अधिगम के बाद व्यक्ति स्वयं और दुनिया को समझने के योग्य हो पाता है।
  • अर्थ निकालना, अमूर्त सोच (Abstract Thought) की क्षमता विकसित करना, विवेचना व कार्य, अधिगम की प्रक्रिया के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पहलू हैं।
  • मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7 से ।। वर्ष तक) इस अवस्था में बालक में वस्तुओं को पहचानने, उनका विभेदीकरण (Differentiation) करने तथा वर्गीकरण (Classification) करने की क्षमता विकसित हो जाती है।
  • पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त के अनुसार, हमारे विचार और तर्क अनुकूलन के भाग हैं। संज्ञानात्मक विकास एक निश्चित अवस्थाओं के क्रम में होता है।
  • पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया है |
  • शिशु के सामाजिक सम्पर्क का दायरा बहुत ही सीमित होता है। अतः सामाजिक विकास के दृष्टिकोण से उनसे बहुत आशा नहीं की जा सकती।
  • बाल्यावस्था में प्रवेश करने के साथ-साथ अधिकांश बच्चे विद्यालय में जाना प्रारम्भ कर देते हैं और अब उनका सामाजिक दायरा बहुत विस्तृत बन जाता है।
  • जब बच्चा किसी समस्या के समाधान के लिए किसी वयस्क या साथी के मार्गदर्शन की उपस्थिति में कार्य करता है तो वह प्रक्रिया स्कॉफ होलडिंग कहलाती है |
  • जब बच्चा किसी समस्या के समाधान का हल किसी की सहायता / मार्गदर्शन में करता है तो वह प्रक्रिया सहारा देना कहलाती है।
  • वाइगोत्स्की ने बताया कि समाज से घुलने-मिलने के फलस्वरूप ही उसमें विभिन्न प्रकार का विकास होता है।
  • लॉरेन्स कोह्लबर्ग का नैतिक विकास की अवस्था का सिद्धान्त लॉरेन्स कोहवर्ग ने जीन पियाजे के सिद्धान्त को आधार बनाकर नैतिक विकास की अवस्था का सिद्धान्त दिया |
  • अक्षमता का लक्षण कौन से है ? – एक अध्यापक का अपनी कक्षा में इस बात पर ध्यान जाता है, कि एक बच्चे को भाषा पढ़ने एवं समझने में कठिनाई हो रही है तो यह अक्षमता का लक्षण है |
  • पढ़ने में अक्षमता (डिस्लेक्सिया) का लक्षण हो सकता है।
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  • डिस्लेक्सिया सीखने में विशेष तरह की कठिनाई का एक आम प्रकार है, जो मुख्य रूप से पढ़ने और शब्दों की वर्तनी की क्षमता को प्रभावित करता है |
  • गणना में अक्षमता — डिस्कैलकुलिया का लक्षण है।
  • लिखने में अक्षमता — डिस्ग्राफिया का लक्षण है।
  • अभ्यास करने में अक्षमता- – डिस्प्रेक्सिया का लक्षण है।
  • अपने आप के बार में समझ बनाने को वास्तविक ज्ञान कहा जाता है। दूसरो को समझना बुद्धिमानी है, तो खुद को समझ पाना ही असली ज्ञान है।
  • उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य क्या है ? – विद्यार्थियों की भाषा संबंधी अशुद्धियों को दूर करना तथा इनको दूर करके कक्षा के अन्य विद्यार्थियों के बहुमूल्य समय को नष्ट होने से बचाना। कमजोर तथा शिक्षण में पिछड़े छात्रों के निदानात्मक मूल्यांकन के पश्चात उनकी कमजोरी के क्षेत्र में सुधार के लिए उपचारात्मक शिक्षण का उपयोग होता है।
  • शिक्षार्थियों को अच्छी तरह से रटाना, उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य नहीं है।
  • यदि शिक्षक सभी बच्चों की अधिगम शैली को ध्यान में रखकर शिक्षण करना चाहते हैं, तो उहें विद्यार्थियों की विविधता को संबोधित करने के लिए विविध प्रकार की शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए।
  • आज की शिक्षा पद्धति बाल-केन्द्रित है। इसमें प्रत्येक बालक की ओर अलग से ध्यान दिया जाता है पिछड़े (Backward) हुए और मन्दबुद्धि , प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा का विशेष पाठ्यक्रम देने का प्रयास किया जाता है।
  • मूल्यांकन और परीक्षण शिक्षण से ही शिक्षक की समस्या हल नहीं हो जाती। उसे बालकों के ज्ञान और विकास का मूल्यांकन और परीक्षण (Evaluation and Test) करना होता है।
  • सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) का अर्थ छात्रों के विद्यालय आधारित मूल्यांकन की प्रणाली से है, जिसमें छात्रों के विकास के सभी पक्ष शामिल हैं।
  • मस्तिष्क एवं बुद्धि (Brain and Intelligence), मनुष्य की उन क्रियाओं के परिणाम है, जिन्हें वह जीवन की विभिन्न व्यावहारिक एव सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए करता है। ज्यों-ज्यों यह जीवन की दैनिक क्रियाओं को करने में मानसिक शक्तियों का प्रयोग करता जाता है, त्यों-त्यों उसका विकास भी होता जाता है।
  • सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत उन बस्तियों में नए स्कूल बनाने का प्रयास किया जाता है, जहाँ बुनियादी स्कूली शिक्षा की सुविधा नहीं है।
  • सर्वशिक्षा अभियान भारत सरकार द्वारा 2000-01 में प्रारम्भ किया गया था। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना की शुरुआत 2004 में हुई थी, जिसके अन्तर्गत समस्त लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा देने का सपना देखा गया था, बाद में यह योजना सर्व शिक्षा अभियान के साथ विलय हो गई। सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए गए थे।
  • प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण सार्वभौमीकरण का अर्थ होता है, सब के लिए उपलब्ध कराना।
  • बुद्धि बुद्धि (Intelligence) शब्द का प्रयोग सामान्यतः प्रज्ञा, प्रतिभा, ज्ञान एवं समझ इत्यादि के अर्थों में किया जाता है।
  • रायबर्न के अनुसार, “बुद्धि वह शक्ति है, जो हमें समस्याओं का समाधान करने और उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता देती है।”
  • बुद्धि-परीक्षण के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व की विशेषताओं का पता लगाया जाता है।
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